क्या दमा और अस्थमा को हमेशा के लिए ठीक किया जा सकता है। asthma ka permanent ilaj in hindi

 क्या अस्थमा पूरी तरह से ठीक हो सकता है| asthma ka permanent ilaj in hindi 

क्या अस्थमा पूरी तरह से ठीक हो सकता है|

    इस पूरे संसार में करीब 40 करोड़ से ज्यादा लोग दमा या अस्थमा रोग से पीड़ित हैं। इसलिए आजका लेख इस पर है कि क्या अस्थमा पूरी तरह से ठीक हो सकता है और asthma ka permanent ilaj क्या है।

 ● दमा और अस्थमा में अंतर dama vs asthma difrence

दमा और अस्थमा दोनों एक ही रोग हैं दोनों में रोगी को सांस लेने और छोड़ने में परेशानी होती है। हर साल करीब 3 करोड़ लोग इस बीमारी के कारण मौत के मुंह में समा जाते हैं।

● अस्थमा के लक्षण- asthma ke lakshan in hindi

  हमारे शरीर को बेहतर काम करने के लिए और सांस लेने के लिए स्वस्थ और मजबूत फेफड़ों की जरूरत होती है।

    अगर हमारे फेफड़ों में किसी भी तरह की कोई समस्या या रोग हो जाते हैं तो हमको सांस लेने में बहुत परेशानी होती है। अक्सर ऐसा देखा गया है कि सर्दी या बरसात के मौसम में या फिर जब मौसम बदलता है तब फेफड़ों में बलगम जमा हो जाता है या सर्दी, खांसी, जुकाम लग जाती है। ऐसे में हम बहुत परेशान हो जाते हैं।
 
      मगर जब व्यक्ति को दमा या अस्थमा होता है और उस समय यह सब रोग होते हैं तो इंसान के प्राण तक निकलने लगते हैं। अगर किसी इंसान को ब्रोंकाइटिस और कोई अन्य पुरानी क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पलमोनरी डिसीज यानी सीओपीडी रोग है तो फिर ऐसे में उसको तो और भी ज्यादा परेशानी होती है। अगर ऐसे व्यक्ति का बलगम अच्छी तरीके से साफ नहीं होता है तो उसको सांस लेने में बहुत परेशानी होती है।
अस्थमा का स्थायी इलाज,

● दमा या अस्थमा क्यों होता है कारण-dama ya asthma hone ke karan

दमा या अस्थमा फेफड़ों में कमजोरी या इन्फेक्शन की वजह से पैदा होने वाले रोग हैं। दमा रोग में आमतौर पर सांस लेने में बहुत परेशानी होती है। साथ ही साथ दमा के रोगियों को अपने रोजमर्रा के काम और एक्टिविटीज को करने के लिए बहुत कठिनाई झेलनी पड़ती है। 
 
      दमा के रोगियों को अगर सही इलाज में देरी की जाती है तो दमा जानलेवा भी हो सकता है। आजकल बढ़ते प्रदूषण के कारण दमा जैसे गंभीर और जटिल रोग फैलते ही जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ का मानना है कि हमारे भारत में लगभग 25 मिलियन (2.5 करोड़) के आसपास दमा रोगी हैं।

    दमा रोग की शुरुआत अधिकतर 5 से 11 साल के बच्चों में ज्यादा होती है। जब हम सांस लेते हैं तो वह वायु हमारे नाक के रास्ते गले और फेफड़े में जाकर खून में मिल जाती है और इससे हम को ऑक्सीजन मिलता है। यह ऑक्सीजन हमारे शरीर में जाकर हमको एनर्जी देता है।

   हमारा फेफड़ा बिल्कुल स्पंज की तरह लचीला होता है इस लचीलेपन के कारण ही हम सांस ले पाते हैं और छोड़ पाते हैं। मगर जब हमको दमा हो जाता है तो यह फेफड़े अपना लचीलापन खो देते हैं। जिस वजह से हम सांस तो ले लेते हैं परंतु सांस छोड़ने में हमको बहुत परेशानी होती है और फिर सांस फूलने लगती है।

  जब हम सांस को अच्छी तरह ले और छोड़ नहीं पाते हैं तो हमारे फेफड़े के अंदर बलगम बनने लगता है। जिस वजह से हमारे सांस की नली ब्लॉक होने लगती है और फेफड़े में ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने लगती है। इस ब्लॉकेज को दूर करने के लिए दमा का दौरा या फिर खांसी आने लगती है। जिससे कि हम सांस ले सकें।

  जब यह बलगम बच्चों में ज्यादा बढ़ जाता है तो बच्चों को निमोनिया का इंफेक्शन हो जाता है। कई बार तो दमा का अटैक इतनी जोर से आता है कि इन्सान का दम ही घुटने लगता है और इन्सान को लगता है कि अब उसका दम निकल जाएगा। 

     एक पुरानी कहावत भी है कि दमा दम निकलने के साथ ही जाता है, यह इसीलिए बना है क्योंकि दमा एक जटिल रोग है यह बहुत मुश्किल से काबू में आता है। वरना दम निकलने के साथ ही यह पीछा छोड़ता है।
   इसके अलावा भी अस्थमा और दमा होने के कई सारे कारण हैं जैसे:-

 ●  खानदानी अस्थमा की बीमारी- asthma ki khandani bimari

 खानदान में किसी को पहले से दमा होना यानी किसी के घर में अगर पहले से ही किसी के माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी को अस्थमा या दमा है तो उनके बच्चों को भी दमा हो सकता है।
asthma ka permanent ilaj in hindi

  ● वायरल इंफेक्शन से अस्थमा- virus se asthma

जिन बच्चों को बचपन में वायरल इंफेक्शन हो जाता है उनको भी दमा होने का खतरा बहुत रहता है, और यह 5 से 11 साल के बच्चों में ज्यादा होता है। क्योंकि उस समय बच्चों की इम्युनिटी बहुत कमजोर होती है और उस समय उन पर वायरस और बैक्टीरिया का अटैक बहुत ज्यादा और आसानी से होता है। ऐसे में अगर लापरवाही बरती गई तो बच्चों का इंफेक्शन बढ़ जाता है, और बाद में यह दमा या अस्थमा का रूप ले लेता है

  ● एलर्जी से अस्थमा- allergy se asthma

कुछ लोगों को कुछ चीजों से एलर्जी होती है जैसे पेंट, किसी चीज का धूल या धुआं, कोई खाना, खाने की खुशबू या बदबू, आदि चीजों से। मगर जब यही चीजें बार-बार उनके संपर्क में आती हैं तो इससे भी उनको दमा हो जाता है।

 ● अस्थमा का सबसे बड़ा कारण प्रदूषण- asthama ka mukhy karan pollution

आजकल जमाना बहुत तेजी से विकास कर रहा है उसी के साथ प्रदूषण का विकास भी खूब हो रहा है। रोड पर चलने वाली डीजल पेट्रोल वाली गाड़ियां बहुत सारा धुआं छोड़ती हैं। वहीं औद्योगिक विकास के कारण कारखाने भी बहुत सारा कचरा और धुआं छोड़ते हैं इन सब की वजह से पर्यावरण बहुत प्रदूषित हो गया है, और इस प्रदूषित पर्यावरण का सबसे ज्यादा इफेक्ट हमारे स्वसन तंत्र पर पड़ता है, जिस वजह से हमको दमा या अस्थमा हो जाता है।
दमा या अस्थमा का इलाज,

  ● मोटापा भी अस्थमा का कारण- motapa se asthama

     मोटापा भी दमा का एक कारण हो सकता है क्योंकि मोटे व्यक्तियों को अपनी एनर्जी को बूस्ट करने के लिए ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है। साथ ही उनके शरीर का वजन इतना बढ़ जाता है कि उसका दबाव उनके छाती पर पड़ता है, और उनका वजन उनके लिए बोझ बन जाता है।
 
    जब वह कहीं चलते फिरते हैं उठते बैठते या कहीं सीढ़ी वगैरह चढ़ते हैं तो इस वजन के कारण उनको ज्यादा सांस लेने की जरूरत पड़ती है। जिस वजह से उनको भी आगे चलकर दमा रोग हो जाता है।

  ● मौसम में नमी से अस्थमा या दमा- Mausam ki kharabi se asthma

अगर कहीं किसी जगह पर मौसम बहुत ज्यादा ठंढा होगा या नम रहता है तो वहां के लोगों पर भी इसका असर पड़ता है। क्योंकि ठंडी नम और आद्र जगह पर सांस लेने में बहुत परेशानी होती है। इसलिए जो व्यक्ति इन जगहों पर रहकर सावधानी नहीं बरतते उनको भी दमा रोग हो जाता है।।

  ● अस्थमा का आयुर्वेदिक और देशी इलाज asthma ka ayurvedik ilaj

अस्थमा का इलाज करने से पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि अस्थमा का सही इलाज क्या है। अस्थमा एक उम्र भर चलने वाली बीमारी है।

  यह किसी एक दवाई के खाने से खत्म नहीं होती है। इसलिए सिर्फ दवाइयां के भरोसे ना रहे। बल्कि अपनी लाइफ स्टाइल में चेंजेस करें। अब चलिए आगे बात करते हैं अस्थमा का देसी इलाज या अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज के बारे में।

 ● अस्थमा का आयुर्वेदिक इलाज हल्दी से- haldi se asthma ka ilaj

      खांसी और दमा के रोगी के लिए हल्दी एक वरदान साबित हो सकती है। अगर आपको दमा या अस्थमा है तो एक चम्मच अदरक का रस एक चम्मच हल्दी और एक चम्मच नींबू इन तीनों का आपस में मिलाकर हल्का सा गर्म करके पी जाएं। इससे दमा, सांस फूलना, अस्थमा और खांसी आने की समस्या 5 मिनट के अंदर ही ठीक हो जाती है। और रोगी को बहुत आराम मिलता है।

       गले और छाती में कितनी भी खराबी क्यों ना हो जाए, चाहे इन्फेक्शन क्यों ना हो उनको ठीक करने के लिए हल्दी बहुत फायदेमंद चीज है। हल्दी में एंटीबैक्टीरियल और  एंटी इंफ्लामेटरी गुण होते हैं। हल्दी गले में जमे हुए कफ को बाहर निकालती है और अगर किसी को टॉन्सिलाइटिस हो गया है तो यह उसको भी ठीक करती है।
 
       हल्दी का प्रयोग करने के लिए कच्ची हल्दी का रस मुंह में डालें फिर मुंह को बंद करके बैठ जाए और इसको अच्छी तरीके से मुह में घुपने दे और निगल जाए इससे वायरल फीवर, खांसी, जुकाम, टॉन्सिल आदि सब सही हो जाते हैं। साथ ही यह बच्चों के टॉन्सिल के लिए भी बहुत ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।

क्या अस्थमा पूरी तरह से ठीक हो सकता है| asthma ka permanent ilaj in hindi

 
● स्टीम से अस्थमा का इलाज- bhap se asthama ka ilaj

       स्टीम भी आपकी बंद स्वांस की नालियों को खोलता है फेफड़े की लचीलेपन को बढ़ाता है और गले में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस के ऊपर अपना अच्छा असर डालता है। 

      स्टीम यानी कि भाप को प्रयोग करने के लिए एक बड़े कटोरे या बर्तन में 1 या 2 लीटर पानी गर्म करें। उसके अंदर 15 से 20 तुलसी के पत्ते डाले हैं और चार-पांच लौंग डालें फिर अपने सर को किसी तौलिए से ढककर अपने पूरे चेहरे को उस पानी के ऊपर झुका कर उसका स्टीम अपने नाक और मुंह से अंदर सांस के जरिये खिंचे। 

      इससे आपके रेस्पिरेटरी सिस्टम में भाप जाएगी और यह भाप आपके रेस्पिरेट्री सिस्टम में मौजूद बलगम को ढीला करेगी तथा वायरस और बैक्टीरिया को खत्म करेगा। 

     अगर ज्यादा गर्मी लगे तो तौलिए को थोड़ी थोड़ी देर के लिए हटाकर बाहर की ठंडी हवा ले सकते हैं फिर उसके बाद सही से प्रयोग को करते रहे। 5 से 10 मिनट तक भाप लेने के बाद आपको बहुत हल्का फील होगा और खांसी जुकाम तथा सांस फूलने की समस्या ठीक होगी।

  ● अदरक और काली मिर्च अस्थमा की देशी दवा- adrak aur kali mirch se asthama ka ilaj

    अदरक का रस रेस्पेरिट्री सिस्टम के लिए एक अमृत की तरह काम करती है। अगर आपको खांसी हैं या सांस फूलने की समस्या है तो अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े या स्लाइस काटकर इनके ऊपर पिसी हुई काली मिर्च डालें और मुंह में रखकर चबायें।

     जब अच्छे से इसका रस निकल जाए तो रस को निगल जाएं। और ऊपर से 1 कप हल्का गुनगुना पानी पी ले इससे तुरंत  सांस फूलना बंद हो जाएगा और खांसी में राहत मिलेगी। अगर यह ज्यादा कड़वी लगे तो इसमें दो चम्मच गुड़ या शहद भी मिलाकर खा सकते हैं इससे इसका कड़वाहट ठीक हो जाएगा और फायदा भी बढ़ेगा।

  ● अस्थमा की देशी दवा गौमूत्र- gaumutra se asthma ka ilaj

    गौ मूत्र का नाम सुनते ही बहुत लोग नाक सिकोड़ने लगते हैं अगर आपको छाती की बीमारी जैसे दमा, अस्थमा या ब्रोन्कियल अस्थमा इन सभी बीमारियों से छुटकारा चाहिए तो उसके लिए गोमूत्र बहुत लाभदायक होता है।

      गोमूत्र का प्रयोग करने के लिए एक कप ताजे गोमूत्र को रोज सुबह खाली पेट पियें और इसका प्रयोग लगातार 4 से 6 महीना करना है। इसके प्रयोग से आपकी टी बी का रोग भी ठीक हो जाता है। 

       कहने में थोड़ा अटपटा लगता है मगर सही है गोमूत्र के अंदर बहुत सारे आयुर्वेदिक और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। गोमूत्र स्वास्थ्य रोगियों के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। अगर आप वाकई दमा या अस्थमा से छुटकारा चाहते हैं तो गोमूत्र का प्रयोग जरूर करें।

क्या अस्थमा पूरी तरह से ठीक हो सकता है| asthma ka permanent ilaj in hindi

● अस्थमा की देशी दवा दालचीनी भी- asthma ka deshi ilaj dalchini

    दालचीनी भी दमा और अस्थमा के रोगियों के लिए एक बहुत अच्छी दवा है। दालचीनी लेने से कफ ढीला होकर बाहर निकलता है और दमा रोग में आराम मिलता है। 

      दालचीनी को प्रयोग करने के लिए आधा चम्मच दालचीनी, एक चम्मच शहद और एक कप गरम पानी लेकर सबसे पहले दालचीनी और शहद चाट कर खा जाए फिर ऊपर से एक कप गर्म पानी या एक गिलास गर्म पानी पी जाए। इससे आपको खांसी और दमा में तुरंत राहत मिलेगी और आपकी सांस फूलने की समस्या कम हो जाएगी।

FAQ- 

 ● अस्थमा किसकी कमी से होता है?(Asthma kiski kami se hota hai)

    अस्थमा किसी चीज की कमी से नहीं होता है बल्कि यह कई कारणों से होता है और अगर कमी की बात करें तो जिनका पोषण कमजोर होता है या जिनका शरीर कमजोर होता है और उनके फेफड़ों में कोई संक्रमण हो जाता है तो इससे उनका फेफड़ा खराब और कमजोर हो जाता है।

    इन सब वजह से उनको अस्थमा या दमा नाम की बीमारी हो जाती है। अधिकतर जो लोग कंपनियां या धूल धुएं वाली जगह पर काम करते हैं या जिन लोगों का पोषण कमजोर है या जिन लोगों को कभी छाती को कोई समस्या अथवा टीबी की बीमारी हुई है उनको दमा या अस्थमा की शिकायत ज्यादा होती है।

 ● अस्थमा के मरीज को क्या नहीं खाना चाहिए(asthma ke marij ko kya nahi khana chahiye)

    अस्थमा के मरीज को वह सब चीज नहीं खानी चाहिए जो कफ को बढ़ाती हैं साथ ही साथ वह सब चीजें भी नहीं खानी चाहिए जो पचने में भारी होती हैं। अस्थमा के मरीजों को हल्का सादा और जल्दी पचने वाला तथा ताकतवर भोजन खाना चाहिए।
 
    अस्थमा के मरीज को ज्यादा तली भुनी चीज, मिर्च मसालेदार चीज, मीठी चीज और सड़े गले तथा बासी पदार्थ नहीं खाने चाहिए।

 ● क्या अस्थमा पूरी तरह से ठीक हो सकता है| (kya asthma ka permanent ilaj ho sakta hai)

    अगर आपका यह सवाल है कि क्या अस्थमा पूरी तरीके से ठीक हो सकता है तो इसका उत्तर हां और ना दोनों तरीके से दिया जा सकता है।

    वह इसलिए क्योंकि अस्थमा हमारी लाइफस्टाइल के ऊपर निर्भर करता है अगर हमारा लाइफस्टाइल सही रहेगा तो हमको अस्थमा होते हुए भी पता नहीं चलेगा कि हमको अस्थमा है परंतु यदि हमारा खान-पान और लाइफस्टाइल सही नहीं रहेगा तो हम चाहे जितनी दवाइयां और तरीके अपना लें अस्थमा का अटैक हमको बार-बार होता रहेगा। 

     इसलिए जो हमने उपाय बताएं उन उपायों को अपनाएं और अपने जीवन में योग एक्सरसाइज तथा सही खान-पान को अपनाये।

●● Note

    दमा या अस्थमा को कंट्रोल करने के लिए इसके कारणों को सबसे पहले खत्म करें। क्योंकि जब तक इसके कारणों को खत्म नहीं करेंगे तब तक आपको सही रिजल्ट नहीं मिलेगा, साथ ही अपने खान-पान और इन औषधियों के प्रयोग से आप दमा और अस्थमा को बहुत हद तक कम कर सकते हैं।
      अगर आप एलोपैथिक इनहेलर या दवाइयां वगैरह इस्तेमाल करते हैं तो वह आपको जिंदगी भर लेनी पड़ेगी और उससे दमा सिर्फ कंट्रोल में आता है खत्म नहीं होता है। जबकि आप आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों का प्रयोग करके, अपने आदतों पर कंट्रोल करके, इस रोग को बहुत हद तक कम कर सकते हैं।।।

  ● विशेष:-

आशा करते हैं दोस्तों कि क्या अस्थमा पूरी तरह से ठीक हो सकता है| asthma ka permanent ilaj in hindi के बारे में दी गई जानकारी आपके स्वास्थ्य जीवन के लिए कारगर साबित होगी। पोस्ट को अंत तक पढ़ने के लिए आपका तहे दिल से धन्यवाद। अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो हमें कमेंट जरुर करें। हम आपके सवालों का उत्तर देने की पूरी कोशिश करेंगे।

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